Monday, July 13, 2009

अपनी किस्मत है तो है!

वो नहीं मेरा मगर उससे मोहब्बत है तो है!
ये अगर रस्मों रिवाजों से बगावत है तो है!
सच को मैंने सच कहा .. जब कह दिया तो कह दिया!
अब ज़माने की नज़र हर वक़्त मुझपर है तो है!
जल गया परवाना तो शम्मे की इसमें क्या खता!रात भर जलना- जलाना उसकी फितरत है तो है!
दोस्त बनकर दुश्मनों सा वो सताता है मुझे ...
पर उसी जालिम पे मरना.. अपनी किस्मत है तो है ...... .. .. .

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अनुभूति

मेरे विषय में

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मैं पहले आपकी सुनना चाहूँगा .. मेरे पिता जी ने २५ साल पहले एक नींव रख दी है जिसकी दीवारें अब छत पड़ने के लिए तैयार हैं..और मुझे पूरा विश्वास है कि ये मजबूत दीवारें एक भरे पूरे परिवार को हमेशा सुरक्षित और खुशहाल रखेंगी .. जिसकी एक ईंट मैं भी हूँ.