Sunday, July 12, 2009

कल - आज और मैं

मैंने जब कभी भी अपने कल में देखा तो मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि मुझे आगे बढने, कठिन परिश्रम करने कि प्रेरणा मिली. आज को लेकर मैं बहुत चिंतित रहता हूँ. क्यूँ कि मेरा दिन, या यूँ कहें लक ठीक नहीं चल रहा है. बस भरोसा है खुद पे ... जिससे जोश है मुझमें कुछ कर दिखाने का....
- अजीत मौर्य

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अनुभूति

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मैं पहले आपकी सुनना चाहूँगा .. मेरे पिता जी ने २५ साल पहले एक नींव रख दी है जिसकी दीवारें अब छत पड़ने के लिए तैयार हैं..और मुझे पूरा विश्वास है कि ये मजबूत दीवारें एक भरे पूरे परिवार को हमेशा सुरक्षित और खुशहाल रखेंगी .. जिसकी एक ईंट मैं भी हूँ.